मेरे राजदार समर्थक मित्र बनने का शुक्रिया

मेरी रचनाएं

बुधवार, 26 अक्तूबर 2011

शुक्रवार, 7 अक्तूबर 2011

एक दीप अँधेरे में ...


एक दीप अँधेरे में ...
बरसों से मंदिर के कपाट में 
एक दीप अँधेरे में जल रहा है 
रोशनी की तलाश में भटककर खुद से लड़ रहा है 
कितने दिन बीत गए ...
अपने रूप को , आईने में नही देख पाया 
थोड़ा सा तेल 
वहीं पुरानी बाती 
उसी कपाट पर 
बंद , पडा अपनी दशा से परेशान
फिर भी धीमें -धीमें  जल रहा है 
उस उजले दिन की इंतजार में 
बुझता और जलता 
नया सबेरा ढूंढ़ रहा है 
बरसों से मंदिर की कपाट में 
एक दीप अँधेरे में जल रहा है 

 लक्ष्मी नारायण लहरे "साहिल " 

बुधवार, 5 अक्तूबर 2011

दुआ...

आप सभी को दुर्गा नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं 
और साथ ही साथ बुराई पर अच्छाई की जीत की प्रतिक दशहरा पर्व की भी बधाईयां....
आप से निवेदन है कि अब आपका यह ब्लाग और निचे जो लिंक है वह भी  फेसबुक पर उपलब्ध है तो मेरा आपसे अनुरोध है कि कृपया फेसबुक पर भी अनुसरण करें !! धन्यवाद !! 


http://neelkamalkosir.blogspot.com/


नीलकमल वैष्णव"अनीश" 

रविवार, 2 अक्तूबर 2011

!...!...मुकद्दर...!...!


आज बादलों के आगोश में चाँद को सोते देखा 
सहमी-सहमी रात में तारों को रोते देखा 


जिसे मैंने चाहा एक मुद्दत बीतने तक 
आज मैंने उसे किसी और का होते देखा 


जिसकी आरजू में मैंने एक उम्र गवां दी 
उसे समंदर की गहराइयों में खोते देखा 


जिस मोती को बनाकर रखा अपना मुकद्दर जानकार 
ये "अनीश" किसी और को उसे अपने हार में पिरोते देखा 


नीलकमल वैष्णव"अनीश"

गुरुवार, 29 सितंबर 2011

शुभकामनाएं सन्देश.....

आप सभी ब्लागर मित्रों को माता कौशलेश्वरी के पावन धारा 
पर हो रहे इस पावन बेला "नवरात्रि" पर्व की हार्दिक शुभ कामनाएं 
हमारी यही प्रार्थना है की माता रानी की कृपा से आप और आपके 
परिवार में हमेशा खुशियाँ बनी रही साथ ही साथ आप सभी को आने वाले 
पर्व "दशहरा" की भी अग्रिम शुभकामनाएं 
१. जय माता दी "जय माँ कौशलेश्वरी"
२.मेरी धरमपत्नी एवं माता जी 

नीलकमल वैष्णव"अनीश"

गुरुवार, 22 सितंबर 2011

आतंक की जननी...

प्रगति !!!
प्रगति आतंक की जननी है 
खून तो मानो आतंक है 
पर प्रगति तो धमनी है 
प्रगति ने किया बंदूकों का आविष्कार 
इंसानों ने किया अपनों का ही शिकार 
प्रगति ने ही किया परमाणु अस्त्रों का आविष्कार  
जल गया हिरोशिमा नागासाकी जिसका न कोई आधार 
प्रगति अभी खोज रही थी कैंसर का उपचार 
लो आ गया नया एड्स का भरा पूरा परिवार 
प्रगति ने ही किया है वकील अदालतों का आविष्कार 
बोफोर्स, हवाला चारा करके भी बच गई सरकार 
प्रगति का सबसे बड़ा आविष्कार तो है नोटों की लम्बी तलवार 
जिससे काटो तो ना निकले खून और बचे कातिल हर बार..... 


बुधवार, 14 सितंबर 2011

"हिंदी-दिवस" की शुभकामनाएं...



आप सभी ब्लागर मित्रों को नीलकमल वैष्णव का 
सादर साहित्याभिवादन.....
आप सभी के स्नेह और सहयोग का मैं बहुत बहुत 
धन्यवाद देता हूँ आज हिंदी दिवस के इस शुभ दिन 
पर मैंने आप मित्रों के सहयोग से अर्धशतकीय पारी
(अनुसरणकर्ता की) पूरी कर ली है 
जिसका सारा श्रेय मैं सिर्फ और सिर्फ आप सभी ब्लागर 
साथियों को दूंगा जो मुझे अनुसरण करके मुझे इस मुकाम 
तक पहुँचाया. 
और आज के इस पावन अवसर "हिंदी-दिवस" पर आप सभी को अनेकानेक बधाईयाँ...
आज हम यह संकल्प करते हैं की हम सदैव अपने मातृ-भाषा 
मान सम्मान बनाये रखेंगे...... 


नीलकमल वैष्णव "अनिश"

शुक्रवार, 9 सितंबर 2011

ऐसा देश है मेरा.....

पढ़ा लिखा है यहाँ संतरी 
अशिक्षित है शिक्षामंत्री 
सुन लो ओ जग वालों 
कहता हूँ मैं खरी-खरी 
ऐसा देश है मेरा ऐसा देश है मेरा 
जिसको घर का काज न आवे 
वो प्रदेश का राज चलावे 
जहाँ का लीडर अपनी सोचे 
और समाज का बैंड बजावे 
ऐसा देश है मेरा ऐसा देश है मेरा
भाई भतीजा वाद बहुत है 
भ्रष्टाचार आबाद बहुत है 
मानवता ईमान नहीं कुछ 
धर्म के नाम पे फसाद बहुत है 
ऐसा देश है मेरा ऐसा देश है मेरा
पत्थर पे लाखों का हार सजाते 
पर गरीब को मार भगाते 
अंधविश्वास का हाल ये देखो 
बच्चों का भी शीश चढाते 
ऐसा देश है मेरा ऐसा देश है मेरा
हम दो हमारे सौ का नारा है 
आबादी बढ़ाना ही काम प्यारा है 
लड़की उनको भी कुंवारी चाहिए 
जो खुद सौ-सौ मुंह मारा है 
ऐसा देश है मेरा ऐसा देश है मेरा
लोग चवन्नी बस यहाँ कमाते 
शाम हुई खूब पी के आते 
ज्ञान के नाम पर शून्य हैं फिर भी 
बातें बड़ी-बड़ी कर जाते 
ऐसा देश है मेरा ऐसा देश है मेरा
'हीरो' की तुम देखो बातें 
फुटपाथ पर गाडी चलते 
लोग फिर भी है उनके 'फैन'
जो लोगों को नींद में उड़ाते 
ऐसा देश है मेरा ऐसा देश है मेरा
विश्व सुंदरी भी क्या कमाल करें 
परोपकार समाज सेवा की बात करे 
पहनते ही ताज मगर वो भी 
'बॉलीवुड' की ही राह धरे 
ऐसा देश है मेरा ऐसा देश है मेरा
कहीं-कहीं हैं रातें उजली 
कहीं-कहीं हैं दिन में भी अँधेरा 
चंद लोग तो महलों में सोते 
बाकी का है फुटपाथ बसेरा 
ऐसा देश है मेरा ऐसा देश है मेरा

रविवार, 4 सितंबर 2011

०५ सितम्बर शिक्षक दिवस एवं १४ सितम्बर हिंदी दिवस विशेष......


हिंदी महिमा.....
हिंदी हिन्दुस्तानी, हिंद की ये भाषा 
इस हिंदी में छिपी हुई है, उन्नति की परिभाषा 
भारत माता की उर माला का, मध्य पुष्प है हिंदी 
माता के मस्तक पर, जैसे शोभित हो बिंदी 
यह भरती गागर में सागर, लिखता जग देख ठगा सा 
!! हिंदी ....................................... परिभाषा !!
इस हिंदी में महाकाव्य रच तुलसी हुए महान 
अर्थ गंभीर ललित श्रृंगारिक, सब करते गुणगान 
नीराजन यह भूमि भारत का, जन-जन की है यह आशा 
!! हिंदी ....................................... परिभाषा !!
अपनी संस्कृति अपनी मर्यादा, अपनी भाषा का ज्ञान 
यही एक पाथेय हमारा, रहे सदा यह ध्यान 
बिन इसके यदि बढ़ा कदम, हम बनेंगे जग में तमाशा 
!! हिंदी ....................................... परिभाषा !!
अपनी भाषा की समर्थता से, हम सामर्थ्य बढ़ाये 
प्रगति वास्तविक है तब ही, जब सब हिंदी अपनाएं 
भारत का उत्थान है हिंदी, अमृत निर्झर झरता सा 
!! हिंदी ....................................... परिभाषा !!
अपने घर में अपनी भाषा हिंदी अपमानित न होवें 
वह है अभागा अमृत पाकर कालजयी जो ना होवें 
हिंदी सेवा में जुटकर साथी, अब झटके दूर हताशा 
!! हिंदी ....................................... परिभाषा !!
हिंदी पर गर्व करेंगे जब हम, देश महान बनेगा 
दिग दिगंत में व्यापित हिंदी नवल वितान बनेगा 
भारत का मान बढेगा ऐसा, होगा अम्बर झुका-झुका सा 
!! हिंदी ....................................... परिभाषा !!

आप सबको ०५ सितम्बर शिक्षक दिवस एवं
१४ सितम्बर हिंदी दिवस की अग्रिम 
ढेर सारी शुभकामनाएं !!!!

नीलकमल वैष्णव"अनिश"

गुरुवार, 1 सितंबर 2011

इंतज़ार........


शब्द को सुन  कर ही 
लगता है लम्बा समय है 
अगर कोई किसी को इंतज़ार 
करने के लिए कहता है तो फिर 
पूछिये मत क्योंकि सभी को
मालुम है कि इंतजार की घड़ी 
कितनी लम्बी होती है ?
हर एक पल एक सदी के समान गुजरता है 
और मैंने भी तो काफी इंतज़ार किया है, 
इंतज़ार...
इस शब्द का अर्थ मुझसे 
अच्छा और कौन बता सकता है 
क्योंकि मैंने पूरी जिंदगी 
सिर्फ और सिर्फ तुम्हारा 
इंतजार ही तो किया है 
पर पता नहीं यह मौत 
आजतक आई क्यों नहीं........???

नीलकमल वैष्णव"अनिश"

शनिवार, 27 अगस्त 2011

ईश्वर को प्रसन्न रखने के उपाय....



हमें विवेक की आँखें खोलकर यह देखना चाहिए कि प्रशंसा करने,
गिड़गिडाने, नाक रगडऩे या रिश्वत देने से हम किसी बुद्धिमान
संसारी का भी प्यार, अनुग्रह प्राप्त नहीं कर सकते तो
ईश्वर को इस प्रकार के बहकाने से कैसे संतुष्ट किया जा सकेगा?  
पूजा-उपासना का मतलब ईश्वर को, ईश्वरीय आयोजन
एवं निर्देश को स्मृति पटल पर मजबूती से जमा लेना तथा
अपने में अधिकाधिक निर्मलता विवेकशीलता 
उत्पन्न करना भर है,
यह अपना नित्य कर्म है जिससे आत्म-शोधन और
आत्मजागरण का प्रयोजन भर पूरा होता है।
ईश्वर इतने भर से संतुष्ट नहीं हो सकता ।
उसकी प्रसन्नता के दो बिन्दु हैं ।
प्रथम है, अपनी विचारणा, मनोभूमि, गुण, कर्म,
स्वभाव की श्रृंखला एवं गतिविधियों में अधिकाधिक
पवित्रता, उदारता, उत्कृष्टता एवं आदर्शवादिता का समावेश ।
द्वितीय है, लोकमंगल के लिए समर्पित किए गए बढ़-चढ़
कर अनुदान और श्रमदान । 




               -पं. श्रीराम शर्मा आचार्य
युग निर्माण योजना - दर्शन, स्वरूप व कार्यक्रम-६६ (६.१३)

गुरुवार, 25 अगस्त 2011

कोरे सपने.......



बिना तुम्हारे बंजर होगा आसमान 
उजड़ी सी होगी सारी जमीन 
फिर उसी धधकते हुए सूर्य के प्रखर तले 
सब ओर चिलचिलाती काली चट्टानों पर 
ठोकर खाता, टकराता भटकेगा समीर 
भौंहों पर धुल-पसीना ले तन-मन हारा 
बेचैन रहूंगा फिरता मैं मारा-मारा
देखता रहूँगा क्षितिजों की 
सब तरफ गोल कोरी लकीर 
फिर भी सूनेपन की आईने में  चमकेगा लगातार 
मेरी आँखों में रमे हुए मीठे आकारों का निखर 
मैं संभल न पाऊंगा डालूँगा दृष्टि जिधर 
अपना आँचल फैलायेगी वह सहज उधर.......
नीलकमल वैष्णव"अनिश"
०९६३०३०३०१०
०९६३०३०३०१७

बुधवार, 17 अगस्त 2011

ज्ञान की कुंजी......


ज्ञान की कुंजी
बिना किराये का मकान  - जेल  

सुबह की घड़ी               - मुर्गा 

कलयुग का अमृत         - चाय 

कलयुग का देवता         - चोर 

आज की स्टाइल          - बाब कट 

आज की फिल्म           - मार-धाड़ 

खेत का राजा              - किसान 

हमारे स्कूल का सेन्टर  - बैरान 

चारा घोटाले का नायक - लालू प्रसाद यादव 

आज का गुंडा             - पुलिस 

घोटाले का राजा          - नरसिंह राव 

कापियों में सबसे आगे - रफ कापी 

इज्जतदार आदमी      - माफिया डान 

मार-धाड़ करने में सबसे आगे - स्कूली विद्यार्थी

सेर सुनने में मजा आता है, सेर सुनाने में मजा आता है 
अगर हो शेर सामने तो फिर... भागने में मजा आता है !!!
हा हा हा हा हा हा हा..... 
दोस्तों आज के लिए इतना ही बाकी
किसी और दिन सुनायेंगे अब अपने 
इस ब्लागर मित्र को विदा दीजिये नमस्कार...


नीलकमल वैष्णव "अनिश"
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सोमवार, 15 अगस्त 2011

15 अगस्त...


आप सभी मित्रों को स्वतंत्रता की ६५ वीं सालगिरह 
के इस पावन अवसर की अनेकानेक बधाईयाँ
आज हमारे देश को आजाद हुए ६५ वर्ष हो गए,
पर क्या हम सचमुच सम्पूर्ण रूप से
आजाद हैं ? 

क्या यह वही भारत है जिसका सपना हमारे 
वीर सपूतों ने अपनी प्राणों की बलिदान 
देकर देखी थी ?

पहले हम अंग्रेजों के गुलाम थे पर आज  हम
महंगाई, भ्रष्ट नेताओं और अफसरों के
गुलाम है,


महंगाई इस कदर हमें घेर चुकी 
है जहाँ से निकालने का कोई राह दिखाई
नहीं पड़ रही है
इस महंगाई रुपी डायन का अत्याचार 
इस कदर है कि इसकी मार सभी 
वस्तुओं पर देखी जा सकती है इसकी
असर को
खैर मैंने तो आप लोगों को स्वतंत्रता दिवस 
कि बधाई देने के लिए लिखना शुरू किया 
था पर मैं भटक कर कहाँ जा रहा हूँ इस
महंगाई के फेर में ........

पर एक बात जरुर बोलूंगा कि मुझे तो पता
है की मैं भटक कर कहाँ जा रहा था पर...
क्या किसी को पता है की यह देश की 
महंगाई कहाँ और किस ओर जा रही है ???
नीलकमल वैष्णव"अनिश"
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शनिवार, 13 अगस्त 2011

आप सभी ब्लागर पाठकों को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं 
नीलकमल वैष्णव "अनिश"

सोमवार, 8 अगस्त 2011

व्यंगात्मक क्षणिकाएं......


१:-
वे रिश्वत लेते हुए 
पकड़े गए रंगे हाथों
अगले दिन रिश्वत देकर 
छुट भी गए लगे हाथों.

२:-
ऊपरी आमदनी का एक हिस्सा 
वे अपने सीनियर को खिला रहे हैं
दरअसल वे 
जमाने के साथ चल कर 
ताल से ताल मिला रहे हैं.

३:- 
ये फिल्म वाले भी 
क्या "गजब" ढा रहे हैं 
पहले लगाई "हथकड़ी"
और किया "गिरफ्तार" 
करायी "जेल यात्रा" 
और फिर लगवाई "फांसी"
लेकिन अब "आरक्षण" भी दिला रहे हैं.

४:-
नेता से अभिनेता बनने की बात 
तब उनके दिमाग में आई 
जब चुनाव में उनके
सबसे कमजोर प्रतिद्वंदी ने 
उनकी जमानत जब्त करवाई. 

५:-
फिल्म की हिरोइन का मूड 
तब से अपसेट था 
जबसे उसे मालूम हुआ 
कि जिसे उसने चुम्बन सीन दिया 
वह हीरो नहीं डुप्लीकेट था. 

६:-
एक निर्देशक नेताजी को बतौर हीरो
अपनी फिल्म में लाये 
लेकिन वे सिर पिटते रह गए 
जब नेताजी चुनावी वादे कि तर्ज पर 
शाट देने पांच साल बाद आए. 

७:- 
इंजन चक्की देख के दिया फकीर रोए
साहब बाबू के बिच में फ़ोकट जाए न कोए. 

८:- 
बाबुल कि दुआएं लेती जा, जा तुझको सुखी संसार मिले
तू बेड पर पड़ी सोती रहे, पति खाना लिए तैयार मिले.......

नीलकमल वैष्णव "अनिश"

रविवार, 7 अगस्त 2011

SMS की दुनियाँ से.......

HAPPY FRANDSHIP DAY To YOU
1..
Yaad to Dilon ko aur Paas Karti Hai
Zindagi Tujhsa Dost Hone par naaz karti hai
Mat Ho udaas ke tu Door hai Humse
Kyon ki Doori Hi to Rishton ko
Aur KHAAS karti Hai.
2.. 
Hasraton ki Nigaahon pe sakht Pehra hai..
Na Jaane Kis Ummid pe yeh Dil thehra hai..
Teri Chaahaton ki Kasam, aye Dost..
Apni Dosti ka Rishta Pyaar Se bhi Gehra hai.

HAPPY FRIENDSHIP DAY
         07/08/2011
Neelkamal Vaishnaw "Anish"

शनिवार, 6 अगस्त 2011

भारत की चेतावनी.....


सुन ले ध्यान लगाकर पाक 
खुली रख हमेशा कान और आँख 
नहीं तो हम जलाकर कर देंगे तुझको ख़ाक 
भूल कर भी यहाँ पर कदम मत रखना 
देखा है तुमने पहले भी भारत का करिश्मा 
कश्मीर हड़पने का सपना तू छोड़ 
हम हैं, सब मिलकर पुरे सौ करोड़ 
भूलकर भी समझना मत कितनी अच्छी है कहानी 
भारत की हर जवानों की यह है जुबानी 
हमने तो समझा था पड़ोसी है पाकिस्तान 
गलती की सज़ा में हम बनायेंगे उसे कब्रिस्तान 
हमारे यहाँ पे है हमेशा शराफत का सम्मान 
इसलिए, पाक सुन भारत की चेतावनी 
समय से पहले समझ वरना आयेगा तेरे आँखों में पानी !!!

नीलकमल वैष्णव"अनिश"

बुधवार, 25 मई 2011

जिंदगी में तुम .....

 कविता 
जिंदगी में तुम ..... 
न जाने कब तुम  आई इस जमी पे 
लोग तुम्हें क्या नाम दिए 
राह न मिला कोई राही बनकर चलता रहा 
जिन्दगी बस यु ही कटती रही
मधुर वाणी ..नीलकमल वैष्णव "अनिश"